अभी सो कर उठी हूँ
मुंह नहीं धोया
फेंको
थोड़ी सी शराब
मेरे चेहरे पर.
उठाओ हंटर
और खींचो मेरे बदन पर
नई सीमारेखाएं .
सम्मानित करो
जूतों के ताज से.
मिट गयी है
मेरे गाल से
उँगलियों की छाप.
जलाओ सिगार
और
बना दो गोरे बदन पर
मोटा सा तिल.
बची नहीं हैं
मेरे बिस्तर पर
सिलवटें .
बुलाओ अपनी पटरानियाँ.
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सती होने से पहले
चाहती हूँ मैं
पतिव्रता होने के
सारे पुरस्कार.