Tuesday, 16 August 2011

मिलते हैं प्रलय के बाद

जब फेस-बुक नहीं था
नहीं था कोई ब्लॉग
जब नहीं थे मोबाइल
 न था कोई टेलीफ़ोन .
तब भी थी दुनिया.... .
और थे रिश्ते .
यहाँ तक कि,
जब तुम नहीं थे 
और मैं भी नहीं 
तब भी थी दुनियां. .
दुनियां तो रहेगी. 
भले ही तुम 
न करो स्वीकार 
मेरी फ्रेंड रिक्वेस्ट. .
भाड़ में गया मैं 
और तुम्हारी कृपा. 
मैं डिलीट करता हूँ 
खुद को 
इन आसमानी तरंगों से 
और 
करता हूँ इंतज़ार 
प्रलय का . 

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