जब फेस-बुक नहीं था
नहीं था कोई ब्लॉग
जब नहीं थे मोबाइल
न था कोई टेलीफ़ोन .
तब भी थी दुनिया.... .
और थे रिश्ते .
यहाँ तक कि,
जब तुम नहीं थे
और मैं भी नहीं
तब भी थी दुनियां. .
दुनियां तो रहेगी.
भले ही तुम
न करो स्वीकार
मेरी फ्रेंड रिक्वेस्ट. .
भाड़ में गया मैं
और तुम्हारी कृपा.
मैं डिलीट करता हूँ
खुद को
इन आसमानी तरंगों से
और
करता हूँ इंतज़ार
प्रलय का .
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